झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है। इलाज के लिए बुलाया गया पुजारी उसी घर में सोते समय चाकुओं से गोदकर मार डाला गया। हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या का आरोप उसी बीमार युवक पर है, जिसके ठीक होने की कामना के साथ पुजारी वहां पहुंचा था।
गोईलकेरा में रातों-रात क्या हुआ?
यह घटना गोईलकेरा प्रखंड के बड़ैला गांव की है। बुधवार तड़के जब गांव वाले सो रहे थे, उसी दौरान एक घर में यह खूनी वारदात हुई। जानकारी के अनुसार, एक बीमार युवक के इलाज के लिए उसके परिवार ने झाड़-फूंक करने वाले पुजारी को बुलाया था। पुजारी रात में उसी घर में रुके हुए थे।
जिसका इलाज करने आया था, उसी ने उठाया चाकू
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रात में जब पुजारी सो रहे थे, तभी बीमार युवक ने चाकू निकालकर उन पर कई वार कर दिए। इस हमले में पुजारी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया। सुबह जब परिवार के लोगों की नींद खुली तो घर में खून से लथपथ पुजारी का शव पड़ा था।
ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक का चलन और खतरे
झारखंड के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में आज भी बीमारियों के इलाज के लिए झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाओं पर निर्भरता देखने को मिलती है। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और पारंपरिक मान्यताओं के चलते लोग पहले पुजारी या ओझा के पास जाते हैं। यह घटना इसी परंपरा से जुड़े एक गंभीर खतरे को उजागर करती है, जहां मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा था।
पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी
घटना की सूचना मिलते ही पश्चिम सिंहभूम पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी युवक की तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में युवक के मानसिक रूप से बीमार होने की बात सामने आ रही है।
परिवार पर क्या बीती, गांव में दहशत का माहौल
इस घटना ने बड़ैला गांव के लोगों को सदमे में डाल दिया है। एक तरफ जिस पुजारी को इलाज के लिए बुलाया गया था, उसकी मौत हो गई, वहीं दूसरी तरफ परिवार का अपना बेटा हत्यारा बनकर फरार है। गांव वालों का कहना है कि युवक पिछले कई दिनों से बीमार चल रहा था और उसके व्यवहार में अजीबोगरीब बदलाव देखे जा रहे थे। इसी वजह से परिवार ने झाड़-फूंक का सहारा लिया था।
मानसिक बीमारी का इलाज अभी भी अंधविश्वास के भरोसे
यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों को आज भी कई इलाकों में चिकित्सकीय समस्या नहीं माना जाता। लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय झाड़-फूंक, तांत्रिक क्रिया या धार्मिक अनुष्ठानों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मरीज को सही समय पर मनोचिकित्सक के पास ले जाया जाए।
पुष्ट तथ्य बनाम जांच में जुड़ रही बातें
अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार पुजारी की चाकू से गोदकर हत्या की पुष्टि हुई है। आरोपी युवक का फरार होना भी तथ्य है। हालांकि, युवक के मानसिक रूप से बीमार होने की बात अभी पूरी तरह से पुष्ट नहीं है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होगा कि हमले के पीछे मानसिक स्थिति थी या कोई और वजह। युवक के परिवार और पुजारी के बीच कोई पुराना विवाद था या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक बड़ा सवाल
झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी कोई नई बात नहीं है। गोईलकेरा जैसे दूरस्थ प्रखंडों में न तो पर्याप्त अस्पताल हैं और न ही मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं। ऐसे में लोगों का पारंपरिक चिकित्सकों या पुजारियों के पास जाना लाचारी भी है। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और जागरूकता अभियान कितना जरूरी है।
ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। परिवार के लोगों को यह समझना होगा कि मानसिक बीमारी कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है जिसका इलाज संभव है। साथ ही, झाड़-फूंक जैसी प्रथाओं में विश्वास करने से पहले लोगों को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता फैलाई जा सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल पुलिस आरोपी युवक की तलाश में जुटी है। उसके पकड़े जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हमले के पीछे असली वजह क्या थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पर बहस छेड़ दी है।
हमारा विश्लेषण
यह घटना दोहरी त्रासदी है। एक तरफ एक व्यक्ति की जान गई, जो शायद अपने तरीके से मदद करने आया था। दूसरी तरफ एक बीमार युवक हत्यारा बन गया, जिसे असल जरूरत थी डॉक्टर की, पुजारी की नहीं। यह समाज की उस विफलता को दर्शाता है जहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता नहीं है और लोग पुरानी मान्यताओं पर आज भी भरोसा करते हैं। प्रशासन को इस घटना से सबक लेकर ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोईलकेरा में पुजारी की हत्या कैसे हुई?
पश्चिम सिंहभूम के गोईलकेरा प्रखंड के बड़ैला गांव में झाड़-फूंक करने आए पुजारी की रात में सोते समय चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप उसी बीमार युवक पर है जिसके इलाज के लिए पुजारी वहां आया था।
हत्या के आरोपी की वर्तमान स्थिति क्या है?
घटना के बाद से आरोपी युवक फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।
झाड़-फूंक के दौरान हिंसा की ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं?
मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों का इलाज चिकित्सकीय तरीके से नहीं किया जाता और उन्हें झाड़-फूंक जैसी प्रथाओं के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में मरीज की मानसिक स्थिति अप्रत्याशित व्यवहार का कारण बन सकती है।
मानसिक बीमारी के मरीजों के लिए सही कदम क्या है?
मानसिक बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत किसी मनोचिकित्सक या सरकारी अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करना चाहिए। झारखंड में कई जिला अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।