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India Deep Research · 6 sources Jun 09, 2026 · min read

'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत लगाओ रोक, HC का ऐतिहासिक फैसला; चीफ जस्टिस के आदेश में और क्या?

झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में रेप पीड़िताओं के 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला पीड़िताओं की गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ए...

Rajendra Singh

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'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत लगाओ रोक, HC का ऐतिहासिक फैसला; चीफ जस्टिस के आदेश में और क्या?
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TL;DR — Quick Summary

झारखंड हाईकोर्ट ने रेप पीड़िताओं के 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत रोक लगा दी है। कोर्ट ने पीड़िताओं के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, जीरो FIR दर्ज करने और महिला पुलिस अधिकारी द्वारा बयान दर्ज करने जैसे कई अधिकार दिए हैं। यह फैसला पीड़िताओं की गरिमा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

Key Facts
मुख्य अपडेट
झारखंड हाईकोर्ट ने रेप पीड़िताओं के 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत और पूर्ण रोक लगाने का आदेश दिया।
प्रभाव
पीड़िताओं के बच्चों को राज्य सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया।
आधिकारिक प्रतिक्रिया
कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आना संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
वर्तमान स्थिति
पीड़िताओं का बयान सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए।
आगे क्या
राज्य सरकार को जीरो FIR दर्ज करना अनिवार्य करने और पीड़िताओं के पुनर्वास के लिए दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया।

झारखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में रेप पीड़िताओं के 'टू फिंगर टेस्ट' पर तुरंत रोक लगा दी है। यह फैसला पीड़िताओं की गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो पीड़िताओं को न सिर्फ न्याय दिलाने में मदद करेंगे, बल्कि उनके पुनर्वास और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेंगे।

टू फिंगर टेस्ट पर पूर्ण प्रतिबंध: क्यों यह फैसला ऐतिहासिक है?

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'टू फिंगर टेस्ट' पीड़िता के साथ भेदभाव और अमानवीय व्यवहार है। यह टेस्ट, जो अक्सर पीड़िता की यौन सक्रियता की जांच के लिए किया जाता था, अब पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के टेस्ट से पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से आघात पहुंचता है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

पीड़िताओं के बच्चों को मुफ्त शिक्षा: एक नई उम्मीद

फैसले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पीड़िताओं के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह रेप पीड़िताओं के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाए। यह कदम पीड़ित परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जीरो FIR और महिला पुलिस अधिकारी: पीड़िताओं को मिलेगा सम्मान

हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पीड़िताओं को जीरो FIR दर्ज करने की सुविधा दी जाए। इसका मतलब है कि पीड़िता किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकती है, भले ही घटना उस क्षेत्राधिकार में न हुई हो। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बयान सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए। इससे पीड़िता को बयान देने में सहूलियत होगी और वह बिना किसी डर के अपनी बात रख सकेगी।

पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी: संवेदनशीलता से पेश आना अनिवार्य

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेप पीड़ितों के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आना संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि पीड़िता के साथ किसी भी तरह का अमानवीय या भेदभावपूर्ण व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे पीड़िताओं से कैसे बात करें और उनकी मदद कैसे करें।

पीड़िताओं के पुनर्वास और सुरक्षा पर जोर

फैसले में पीड़िताओं के पुनर्वास और सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़िताओं के लिए एक व्यापक पुनर्वास योजना बनाए, जिसमें मुफ्त चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कानूनी सहायता शामिल हो। साथ ही, पीड़िताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाएं।

क्या है टू फिंगर टेस्ट और क्यों है यह विवादास्पद?

'टू फिंगर टेस्ट' एक पुरानी और अवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें पीड़िता की योनि की जांच करके यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि वह यौन रूप से सक्रिय है या नहीं। यह टेस्ट पीड़िता की गरिमा का हनन करता है और उसे मानसिक रूप से तोड़ देता है। सुप्रीम कोर्ट और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन पहले ही इस टेस्ट को प्रतिबंधित करने की सिफारिश कर चुके हैं। झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

पुष्ट तथ्य बनाम अस्पष्टता: फैसले की सीमाएं

यह फैसला पीड़िताओं के अधिकारों के लिए एक बड़ी जीत है, लेकिन कुछ बातें अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। जैसे, मुफ्त शिक्षा का लाभ कितने बच्चों को मिलेगा और इसके लिए बजट का प्रावधान कैसे किया जाएगा। साथ ही, जीरो FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को लागू करने में कितना समय लगेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इन मुद्दों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

झारखंड सरकार की भूमिका और चुनौतियां

अब सवाल यह है कि झारखंड सरकार इस फैसले को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाएगी। राज्य में पुलिस प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार को पीड़िताओं के लिए एक हेल्पलाइन और विशेष केंद्र स्थापित करने होंगे, जहां वे तुरंत मदद ले सकें। इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता प्रशिक्षण देना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

व्यापक रुझान: देशभर में बदल रहा है नजरिया

यह फैसला देशभर में रेप पीड़िताओं के प्रति बदलते नजरिए का संकेत है। सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट पहले भी इस तरह के आदेश दे चुके हैं। अब झारखंड हाईकोर्ट ने भी इस दिशा में एक मजबूत संदेश दिया है। यह उम्मीद की जाती है कि अन्य राज्य भी इस फैसले से प्रेरणा लेंगे और पीड़िताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएंगे।

पीड़िताओं और उनके परिवारों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन

यदि आप या आपका कोई परिचित रेप का शिकार हुआ है, तो तुरंत नजदीकी थाने में जाएं और जीरो FIR दर्ज कराएं। अपने बयान के लिए महिला पुलिस अधिकारी की मांग करें। किसी भी तरह के 'टू फिंगर टेस्ट' से इनकार करें और तुरंत कानूनी सहायता लें। आप अपने बच्चों की मुफ्त शिक्षा के लिए जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।

भविष्य की संभावनाएं: न्याय की नई राह

यह फैसला रेप पीड़िताओं के लिए न्याय की एक नई राह खोलता है। उम्मीद है कि इससे पीड़िताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता मिलेगी और वे बिना किसी डर के न्याय की मांग कर सकेंगी। हालांकि, इस फैसले को लागू करने में कई चुनौतियां हैं, लेकिन यह एक सकारात्मक शुरुआत है।

हमारी राय

झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक बड़ा बदलाव लाने वाला है। यह पीड़िताओं को उनकी गरिमा और अधिकारों के प्रति जागरूक करता है। हालांकि, केवल कानूनी आदेशों से बदलाव नहीं आएगा। समाज को भी अपनी मानसिकता बदलनी होगी और पीड़िताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी होगी। यह फैसला एक मिसाल है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए सरकार, पुलिस और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टू फिंगर टेस्ट क्या है और इसे प्रतिबंधित क्यों किया गया?

टू फिंगर टेस्ट एक अवैज्ञानिक और अपमानजनक जांच है, जिसमें पीड़िता की यौन सक्रियता की जांच की जाती है। झारखंड हाईकोर्ट ने इसे पीड़िता की गरिमा का हनन मानते हुए प्रतिबंधित कर दिया।

पीड़िताओं के बच्चों को मुफ्त शिक्षा कैसे मिलेगी?

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह रेप पीड़िताओं के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाए। इसके लिए पीड़िता को जिला प्रशासन से संपर्क करना होगा।

जीरो FIR क्या है और इसका लाभ कैसे उठाएं?

जीरो FIR का मतलब है कि पीड़िता किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकती है, भले ही घटना उस क्षेत्र में न हुई हो। इसके लिए तुरंत नजदीकी थाने जाएं और FIR दर्ज कराएं।

पीड़िता का बयान कौन दर्ज करेगा?

कोर्ट ने आदेश दिया है कि पीड़िता का बयान सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक की महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाएगा।

Rajendra Singh

Written by

Rajendra Singh

Rajendra Singh Tanwar is a staff correspondent at News Headline Alert, one of India's digital news platforms covering national and state developments across politics, health, business, technology, law, and sport. He reports on government decisions, policy announcements, corporate developments, court rulings, and events that affect people across India — drawing on official documents, named sources, expert commentary, and verified public records. His work spans breaking news, policy analysis, and public interest reporting. Before each article is published, it is reviewed by the News Headline Alert editorial desk to ensure accuracy and editorial standards are met. Corrections, sourcing queries, and editorial feedback can be directed to editorial@newsheadlinealert.com.