Jharkhand के Ramgarh जिले में खेती का एक नया तरीका तेजी से फैल रहा है। यहां 250 से ज्यादा किसानों ने एग्रोइकोलॉजी-बेस्ड फार्मिंग अपनाई है। यह सब NABARD के ट्राइबल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत हो रहा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
Ramgarh में किसानों का एग्रोइकोलॉजी की ओर रुझान
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Ramgarh जिले के 250 से ज्यादा किसान NABARD के इस प्रोग्राम से जुड़े हैं। यह प्रोग्राम खासतौर पर ट्राइबल डेवलपमेंट पर फोकस करता है। एग्रोइकोलॉजी का मतलब है ऐसी खेती जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर की जाए, जिसमें केमिकल का इस्तेमाल कम हो और मिट्टी की सेहत बनी रहे।
NABARD का ट्राइबल डेवलपमेंट प्रोग्राम कैसे काम करता है
NABARD का यह प्रोग्राम आदिवासी किसानों को सस्टेनेबल खेती के तरीके सिखाता है। इसमें किसानों को ट्रेनिंग दी जाती है और उन्हें नेचुरल फार्मिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे न सिर्फ फसल की पैदावार बेहतर होती है, बल्कि जमीन की उर्वरता भी बनी रहती है।
Hamaari Baat: छोटी शुरुआत, बड़ा बदलाव
हमारी नज़र में यह खबर छोटी लग सकती है, लेकिन इसका असर बड़ा है। जब 250 किसान एक साथ नेचुरल खेती की तरफ बढ़ते हैं, तो यह एक मूवमेंट बन सकता है। Ramgarh जैसे जिले में जहां खेती पर निर्भरता ज्यादा है, वहां एग्रोइकोलॉजी जैसे तरीके किसानों की आमदनी बढ़ाने और मिट्टी को बचाने में मदद कर सकते हैं। NABARD का यह प्रोग्राम सही दिशा में उठाया गया कदम है। उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी किसान इससे जुड़ेंगे।
Sources & References
- Over 250 Jharkhand farmers adopt agroecology under NABARD programme — Hindustan Times