Delhi University के Academic Council ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम' (Semester Away Programme) पर विचार करने के लिए एक पैनल गठित किया है। इस प्रोग्राम के तहत DU के छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों में एक सेमेस्टर पढ़ सकेंगे।
क्या है 'सेमेस्टर अवे प्रोग्राम'?
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, Academic Council ने इस प्रोग्राम को लेकर एक पैनल बनाने का फैसला किया है। ये पैनल देखेगा कि कैसे DU के अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्रों को विदेशी यूनिवर्सिटीज में एक सेमेस्टर बिताने का मौका दिया जा सकता है।
इस प्रोग्राम का मकसद छात्रों को ग्लोबल एक्सपोजर देना है। छात्र अपने कोर्स के दौरान एक सेमेस्टर के लिए किसी फॉरेन यूनिवर्सिटी में पढ़ सकेंगे और वहां के क्रेडिट्स को DU में ट्रांसफर करा सकेंगे।
पैनल क्या करेगा?
ये पैनल प्रोग्राम के हर पहलू पर गौर करेगा — जैसे कि किन यूनिवर्सिटीज के साथ पार्टनरशिप होगी, छात्रों के लिए क्या नियम होंगे, फीस कितनी होगी, और क्रेडिट ट्रांसफर का सिस्टम कैसे काम करेगा।
Hindustan Times के अनुसार, काउंसिल ने मौरिस नगर में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए नए भवन के निर्माण के लिए ₹174.20 करोड़ के आवंटन को भी मंजूरी दी है।
छात्रों के लिए क्या मायने रखता है ये प्रोग्राम?
अगर ये प्रोग्राम लागू होता है, तो DU के छात्रों को बिना डिग्री छोड़े विदेश में पढ़ने का मौका मिलेगा। ये खासकर उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगा जो विदेश में पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन पूरा कोर्स वहां करने का खर्च नहीं उठा सकते।
हालांकि, अभी ये सिर्फ एक प्रस्ताव है और पैनल को इस पर विस्तार से काम करना है। पैनल की रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि ये प्रोग्राम कब और कैसे लागू होगा।
हमारी बात: ये कदम सही दिशा में, लेकिन चुनौतियां भी हैं
हमारी नज़र में, DU का ये कदम सही दिशा में है। आज के ग्लोबल एजुकेशन सिस्टम में छात्रों को इंटरनेशनल एक्सपोजर देना बहुत ज़रूरी है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये प्रोग्राम सिर्फ अमीर छात्रों के लिए होगा या फिर मिडल क्लास और गरीब छात्रों को भी इसका फायदा मिलेगा?
सेमेस्टर अवे प्रोग्राम तभी सफल होगा जब इसमें स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल सपोर्ट का भी इंतज़ाम हो। वरना ये एक और ऐसा प्रोग्राम बनकर रह जाएगा जो सिर्फ कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए ही उपलब्ध होगा।